कविता: संपर्क टूटा था, संकल्प नहीं,
संपर्क टूटा था, संकल्प नहीं,
दूरियाँ बढ़ी थीं, प्यार नहीं।
आँखों में आँसू थे, दिल में नफरत नहीं,
हालात ही ऐसे थे, कोई कसूरदार नहीं।
संपर्क टूटा था, संकल्प नहीं,
मुलाकातें कम हुई, बातें नहीं।
चेहरे पर मुस्कान थी, मन में गम नहीं,
जिंदगी का सफर था, कोई मंजिल नहीं।
संपर्क टूटा था, संकल्प नहीं,
कुछ पुरानी यादें, कुछ नए सपने।
कुछ पल के साथी, कुछ हमसफर,
कुछ खत्म हुए सिलसिले, कुछ ज़िंदा क़रार।
संपर्क टूटा है, संकल्प नहीं,
कल का क्या पता, कोई खुशी हो कोई ग़म।
पर हमेशा ज़िंदा होंगे, हमारे साथ के पल,
संपर्क से ज़्यादा मायने रखते हैं, हमारे संकल्प।
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